
लुधियाना, 27 मई (राजकुमार साथी)। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज वीरेश विकल (भावाधस वीरेश विकल) रजि. की ओर से भगवान वाल्मीकि आश्रम समिति खैरथल के सहयोग से 63वां आदि धर्म स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ व सिक्कम से संस्था के प्रतिनिधियों तथा भारी संख्या वाल्मीकि धर्म को मानने वाले अनुयाइयों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरूआत भगवान वाल्मीकि आश्रम में आदि धर्म ध्वज की स्थापना के साथ की गई।

भावाधस के धर्म गुरू महात्मा बालचंद जी, सर्वोच्च निर्देशक वीरश्रेष्ठ चरण सिंह बबरीक, निर्देशक वीरश्रेष्ठ राजकुमार साथी और भगवान वाल्मीकि आश्रम समिति के संरक्षक वीरश्रेष्ठ बनवारी लाल चांवरिया की देखरेख में आयोजित हुए इस समारोह के दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली व सिक्कम से संगठन के प्रतिनिधि विशेष तौर पर पहुंचे थे। कार्यक्रम में पहुंचने पर आश्रम समिति के अध्यक्ष वीरश्रेष्ठ हरि सिंह अटल तथा भावाधस वीरेश विकल के मुख्य संचालक वीीरश्रेेष्ठ रवि सिद्धू ने सारी संगत व प्रतिनिधियों का स्वागत किया। भावाधस वीरेश विकल के महामंत्री वीरश्रेष्ठ भोपाल सिंह पुहाल ने मंच संलाचन किया और आश्रम समिति के उप प्रधान वीरश्रेष्ठ लल्लू राम तथा वरिष्ठ सदस्य वीर सुरेश गौहर ने कहा कि आज का दिन बड़ा ऐतिहासिक है। क्योंकि पहली बार पंजाब के बाहर वाल्मीकि धर्म समाज का स्थापना दिवस हमारे शहर खैरथल में मनाया जा रहा है। जबकि इससे पहले पिछले 61 सालों से पंजाब में ही यह दिन मनाया जाता रहा है। इसके लिए वे भावाधस वीरेश विकल के संस्थापक सदस्य व निर्देशक वीरश्रेष्ठ राजकुमार साथी का आभार व्यक्त करते हैं। अमृतसर से पहंचे वरिष्ठ धर्म समाजी वीरश्रेष्ठ त्रिलोक गिल ने कहा कि जब वे 25 अप्रैल 2026 को वीरश्रेष्ठ बनवारी लाल चांवरिया की पत्नि के बरसी समागम में हिस्सा लेने के लिए खैरथल आए थे तो यहां का भव्य वाल्मीकि आश्रम देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई थी और उन्होंने भावाधस वीरेश विकल के धर्म गुरू महात्मा बालचंद, सर्वोच्च निर्देशक वीरश्रेष्ठ चरण सिंह बबरीक तथा निर्देशक वीरश्रेष्ठ राजकुमार साथी से इस वाल्मीकि आश्रम में आदि धर्म स्थापना दिवस मनाने की अपील की थी। जिसे स्वीकार करते हुए आज का यह भव्य समारोह यहां मनाया जा रहा है। इसके लिए वे भावाधस वीरेश विकल भारत व भगवान वाल्मीकि आश्रम समिति के आभारी हैं। æò

वीरश्रेष्ठ राजकुमार साथी ने समारोह में मौजूद संगत को आदि धर्म स्थापना दिवस का इतिहास बताते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज से संबंधित मनिषियों ऋषिनाथ रत्नाकर जी महाराज, वीरेश विकल जी महाराज, विरोत्तम बी.एस दयाल व विरोत्तम चौधरी बद्री प्रसाद वाल्मीकिन इलाहाबादी ने जो सपना आज से 63 साल पहले देखा था, वो आज पूरा होता हुआ दिख रहा है। क्योंकि पंजाब के लुधियाना शहर में हुई एक छोटी सी मीटिंग में लिया गया वाल्मीकि धर्म समाज को संगठित करने का फैसला आज एक वट्ट वृक्ष बनकर देश के 22 राज्यों में अपनी जड़ें फैला चुका है। इस लिए आज उन चारों मनिषियों को सजदा करने का दिन है। जिन्होंने यह धर्म समाज रूपी पौधारोपण किया था। उनके बाद हजारों धर्म समाजियों ने इसे अपनी मेहनत से सींचा और यह लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश व पंजाब में भी विभिन्न संगठनों की ओर से यह दिन मनाया जा रहा है। जिसका मकसद धर्म समाज की विचारधारा नशाखोरी बंद करना, अंध विश्वास को त्यागना, अनपढ़ता दूर करना तथा दहेज प्रथा जैसी कुरीति को जड़ से खत्म करके भगवान वाल्मीकि, सतगुरू रविदास जी, सतगुरू कबीर जी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फूले और डॉ. भीम राव अंबेडकर के साथ-साथ उन महापुरुषों की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करना है, जिन्होंने अपने समय काल में क्रांति की लौ को जगाया है। वीरश्रेष्ठ चरण सिंह बबरीक ने कहा कि जब तक एकजुट होकर धर्म समाज की विचारधारा को घर-घर तक नहीं पहुंचाया जाता, तब तक वाल्मीकिन और दलित समाज से संबंधित अन्य जातियों का उत्थान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर जी की विचारधारा को अपनाकर तथा भगवान वाल्मीकि जी, सतगुरू रविदास जी तथा सतगुरू कबीर जी के उपदेशों को जीवन में अमल नहीं किया जाएगा, तब तक तरक्की के रास्ते नहीं खुल सकते। क्योंकि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीएगा, वह दहाड़ेगा। इस लिए सभी को आज का दिन एक त्यौहार के रूप में मनाना चाहिए, क्योंकि आज का दिन हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। आश्रम समिति के संरक्षक वीरश्रेष्ठ बनवारी लाल चांवरिया ने कहा कि वे भावाधस वीरेश विकल भारत के पदाधिकारियों के आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने उनकी कई वर्षों से चली आ रही मांग को आज पूरा करते हुए यह दिन यहां पर मनाया है। उन्होंने कहा कि इस बार कार्यक्रम की तैयारियों के समय काफी कम मिला था, लेकिन अगले वर्ष के लिए वे अभी से तैयारियों में जुटेंगे। ताकि अगले साल पूरे राजस्थान के वाल्मीकिन समाज को इस समारोह में आमंत्रित किया जा सके।

भावाधस वीरश विकल भारत के मुख्य संचालक वीरश्रेष्ठ रवि सिद्धू ने समारोह में आई हुई संगत का धन्यवाद किया और सभी को इस दिन की बधाई दी। कार्यक्रम में भावाधस वीरेश विकल भारत के संचालक वीरश्रेष्ठ नीरज सुबाहू, वरिष्ठ धर्म समाजी वीरश्रेष्ठ राम प्रकाश बोहत, पंजाब युवा विंग के अध्यक्ष वीरश्रेष्ठ कुलदीप धींगान, सिक्किम के प्रभारी वीरश्रेष्ठ करतार सिंह व महिला विंग सिक्कम की अध्यक्ष वीरांगी इंदिरा ने भी संबोधित किया। भजन गायक वीरश्रेष्ठ अमर शंभूक ने भजनों का गुणगान किया। इस मौके पर वीरेश विकल जी महाराज के सहयोगी रहे वीरश्रेष्ठ रमेश समर्पित (दिल्ली), केंद्रिय वाल्मीकि मंदिर अमृतसर के अध्यक्ष वीरश्रेष्ठ विमल कुमार, वीर विजय कुमार, वीर तीर्थ पहलवान, वीर सन्नी चंडालिया (हरियाणा), बहरोड से वीर सिकंदर बोयत, वाल्मीकि एकता संगठन के अध्यक्ष वीर महेश तंबोली, महामंत्री वीर मोनू झंझोट, वीर सुंदर लाल गोगला, वीर राम देव, वाल्मीकि सेना के सुरेंद्र बिवाल, वीर विजय कुमार बोस, वीर अनिल, वीर महेंद्र बिवाल, बाल भारती स्कूल के डायरेक्टर वीर विजेंद्र, वीरांगी संतोष देवी बल्लर, वीरांगी मंजू देवी गौहर, वीरांजी सुनीता चांदपुर, वीर मोनू सेहरा, वीर राजा सारवान, वीर मेवा राम वाल्मीकि, वीर लहरी राम, वीर दुली चंद सहित भारी संख्या में संगठनों के प्रतिनिधि व संगत मौजूद रही। संगत के लिए अटूट लंगर भी लगाया गया।